यह मायावी जीवन: ताओवादी 'लीह-त्ज़ू की पुस्तक' से चयन, 2 का भाग 12026-06-01ज्ञान की बातेंविवरणडाउनलोड Docxऔर पढो"'महामहिम और मैं,' जादूगर ने उत्तर दिया, 'केवल आत्मा में ही भटक रहे थे, और, बेशक, हमारे शरीर बिल्कुल भी नहीं हिले। उस स्वर्ग-महल जिसमें हम रहते थे और पृथ्वी पर महामहिम का महल... इन दोनों में क्या बुनियादी अंतर है...'"